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ब्राह्मण विदेशी है या नही शूद्र मूलनिवासी है या नही, वर्ण व्यवस्था सही है या गलत 

होम्योपैथी मेडिकल सायकोलॉजी के अनुसार मानसिक रोग सिफिलिस दोष के कारण होते है। यह भगवदगीता मे वर्णित तमोगुण से मिलता जुलता है।
यही बात भगवदगीता मे कृष्ण के एक श्लोक से मिलती जुलती है कृष्ण अध्याय 14 के श्लोक 8 मे कहते है।
GunTrayVibhagYog ~ Bhagwad Gita Chapter 14 | गुणत्रयविभागयोग ~ अध्याय चौदह
अथ चतुर्दशोऽध्यायः- गुणत्रयविभागयोग
तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम्‌ ।
प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति भारत ॥ (८)
भावार्थ :
हे भरतवंशी! तमोगुण को शरीर के प्रति मोह के कारण अज्ञान से उत्पन्न हुआ समझ, जिसके कारण जीव प्रमाद (पागलपन में व्यर्थ के कार्य करने की प्रवृत्ति), आलस्य (आज के कार्य को कल पर टालने की प्रवृत्ति) और निद्रा (अचेत अवस्था में न करने योग्य कार्य करने की प्रवृत्ति) द्वारा बँध जाता है। (८)
यहा कृष्ण ने Medical Psychiatry का वर्णन करा है 
Mental disease को इस श्लोक से बताया है उन्होने बताया कि मानसिक रोग का कारण तमोगुण बताया है अर्थात Depression, अवसाद, सीजोफ्रेनिया, पागलपन इसको कृष्ण ने प्रमाद कहा , आलस्य भी तमोगुण से उत्पन्न हुआ ।
यही बात होम्योपैथी के सिफिलिस दोष मे देखने को मिलती है मानसिक रोग सिफिलिस मे ज्यादा होते है , फिर रजोगुण से भी मानसिक रोग होते है परंतु तमोगुण की तुलना मे कम, रजोगुण को होम्योपैथिक मे सायकोटिक दोष ( miasm) कहा है ।
होम्योपैथी के तीन विष सोरा,सायकोसिस और सिफिलिस और भगवदगीता सत, रज और तम ये इनका आपस मै संबंध हमे समझने का प्रयास करना चाहिए ।
सारा रहस्य का पर्दा उठ जाएगा और भगवदगीता की वर्ण व्यवस्था समझ मे आऐगी कि यह गलत है या सही है।
तमोगुण को शूद्र बताया है और होम्योपैथी के अनुसार देखे तो शूद्र सिफिलिस दोष वाले हुऐ अर्थात जो लोग मानसिक रोगी थे कृष्ण ने उन्हे तमोगुणी शूद्र कहा यह बात स्पष्ट नजर प्रतीत होती है।
जो लोग स्वस्थ मानसिक थे उन्हे कृष्ण ने सतोगुण वाला ब्राह्मण कहा ।
आखिर यह माजरा है क्या इसमे थोड़ी रिसर्च की जरूरत है ।
होम्योपैथी मनोवैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है भगवदगीता से कही न कही संबंध है क्योकि होम्योपैथी सुक्ष्म विज्ञान है और क्वांटम मेकेनिक्स पर आधारित है ।
कृष्ण ने mania, psychosis, schizophrenia जेसी मानसिक  बिमारी भगवदगीता मे हजारो सालो पहले बिना किसी खोज के केसे वर्णित कर दी वह भी कारण सहित और होम्योपैथी मे यही बात मिलती जुलती नजर आती है।
होम्योपैथी से भी हम human mental को समझ सकते है 
होम्योपैथी लोगो को तीन mental make up मे divide करती है 
Psora,  Sycosis, and Syphilis – भगवदगीता मे सतगुण, रजगुण और तमगुण 
सतगुण को ब्राह्मण, सतो रजो को क्षत्रिय, रजो तमो को वेश्य, और सिर्फ तमो को शूद्र।
होम्योपैथी मेडिकल साइंस भी DNA लेवल तक का विज्ञान है।
होम्योपैथी आधुनिक रिसर्च के अनुसार क्वान्टम भौतिकी पर आधारित है ।
होम्योपैथी हमारे रोगग्रस्त DNA को ठीक करती है जेसे Down’s syndrome होम्योपैथी से ठीक हो जाता है और अनेक आनुवंशिक खराब गुणसूत्र, के कारण मानसिक और शारिरिक रोग भी होम्योपैथी से आरोग्य हो जाते है।
होम्योपैथी से हम पता कर सकते है कि कोन भारत का मूलनिवासी है या विदेशी है ।
इसके लिए हमे रिसर्च की जरूरत है।
आर्य यदि विदेशी है तो इसका पता होम्योपैथी के सुक्ष्म quantum ज्ञान से लगाया जा सकता है। यदि शूद्र मूल निवासी है तो यह भी साफ हो जाऐगा क्योकि मानसिक अवस्था ही DNA से बनती है जेसे डाउन सिंड्रोम नाम की बिमारी , जिसमे व्यक्ति मानसिक रोगी भी है और शारीरिक भी ।
होम्योपैथी मे रहस्यमय राज छुपा हुआ नजर आता है।
About the Author:
Dr Sunil Rathore (BHMS) 
Article reference: मनोवैज्ञानिक विकृतियाँ और होम्योपैथी – लेखक- डाक्टर पी एस सिन्हा
Psychic disorder and Homoeopathy 
Author: Dr P.S. Sinha

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